KAB TAK?
04 Sep 2011 Leave a Comment
कब तक यु ही मुस्कुराती रहूँगी मैं ?
कब तक इन आसू को छुपाती रहूँगी मैं ?
कब तक लोगों से सहारा मांगती रहूँगी मैं?
कब तक इस भीड़ में खोती रहूँगी मैं?
कब तक अकेले अपनी परझाई से डरती रहूँगी मैं?
कब तक कूद का मखौल बनाती रहूँगी मैं?
कब तक अपनी सोच और हरकतों की नुमाइश करती रहूँगी मैं?
कब तक कूद की नज़र में गिरती रहूँगी मैं?
कब तक हर किसी से आँख मिलाने से डरती रहूँगी मैं?
कब तक इतिहास को दोहराती रहूँगी मैं?
कब तक बस पीछे की ओर जाती रहूँगी मैं?
कब तक बस एक बेचारी बनी रहूँगी मैं?
कब तक इस कब तक का जवाब ढूँढती रहूँगी मैं?
कब तक अपने वजूद पर शक करती रहूँगी मैं?
कब इन साँसों की गुलाम बनी रहूँगी मैं?
